भ्रष्टाचार - चेतना का विक्षेप
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Sprache:Hindi
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Produktdetails
Format
ePUB
Kopierschutz
Ja
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Ja
Text-to-Speech
Ja
Erscheinungsdatum
09.11.2025
Verlag
Sandeep ChavanSeitenzahl
(Printausgabe)
Dateigröße
732 KB
Sprache
Hindi
EAN
9798232360542
"भ्रष्टाचार मिटाने से नहीं, समझने से समाप्त होता है।"
यह पुस्तक भ्रष्टाचार की कहानी नहीं मानव चेतना की यात्रा है। यह दिखाती है कि भ्रष्टाचार केवल धन, शक्ति या राजनीति तक सीमित नहीं, बल्कि वह ऊर्जा के असंतुलन की परिणति है जो व्यक्ति के भीतर से शुरू होकर समाज और व्यवस्था तक फैलती है।
"भ्रष्टाचार: चेतना का विक्षेप", पाठक को एक गहरी अंतर्दृष्टि देता है कि हर असत्य, हर औचित्य, हर सुविधा की मानसिकता वास्तव में चेतना की दिशा बदल देती है। यह न अपराध की व्याख्या है, न आदर्श का उपदेश बल्कि मन और ऊर्जा के उस तंत्र की समझ है जहाँ ईमानदारी, भय, शक्ति और विवेक आपस में उलझे हुए हैं।
लेखक संदीप जे. चव्हाण, जो Universal Energy Dynamics (UED) के प्रणेता हैं, इस पुस्तक में भ्रष्टाचार को केवल सामाजिक नहीं, बल्कि ऊर्जात्मक और मनोवैज्ञानिक घटना के रूप में समझाते हैं। वे दिखाते हैं कि जब चेतना अपनी प्राकृतिक लय से विचलित होती है, तो भ्रष्टाचार केवल परिणाम नहीं, एक संकेत बन जाता है कि मनुष्य को पुनः संतुलन की ओर लौटना है।
पुस्तक चार भागों में विभाजित है:
- भीतर का भ्रष्टाचार व्यक्ति और मन के स्तर पर असत्य की जड़ें।
- व्यवस्था का भ्रष्टाचार जब संस्थाएँ नैतिकता से कट जाती हैं।
- परिणाम और पुनर्संतुलन ऊर्जा कैसे परिणामों से सीखती है।
- निष्कर्ष और चिंतन समझ और जागरूकता का अंतिम सूत्र।
हर अध्याय में लेखक विज्ञान, दर्शन और समाजशास्त्र को एक ही ऊर्जात्मक दृष्टि से जोड़ते हैं जहाँ भ्रष्टाचार शत्रु नहीं, बल्कि चेतना का शिक्षक बन जाता है।
यह पुस्तक उन सभी के लिए है जो सत्य, सुधार और सजगता की भाषा में सोचते हैं। यह आपको यह देखने का निमंत्रण देती है कि आप जिस व्यवस्था में जी रहे हैं, वह आपके भीतर के विचारों का प्रतिबिंब है।
"भ्रष्टाचार से मत लड़ो उसे समझो, वह स्वयं मिट जाएगा।"
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